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Pehla Ehsaas (3rd position)

  • Writer: Strong She
    Strong She
  • Jun 3, 2020
  • 1 min read

वो लम्हा भी कुछ खास था जब मेरा पहला एहसास था

सोच कर डर गया था दिल लेकिन मां का साथ था


मां का ज्ञान लडकी होने का वरदान था

वो लम्हा भी कुछ खास था जब मेरा पहला एहसास था


डर सी गई थी मैं उस रात किसी को कुछ ना बताया था

ये हुआ क्या अचानक मुझे कुछ समझ न आया था


क्या मुझे कोई चोट लगी थी इतना खून जो आया था

अजीब सी बेचैनी थी जिसने नींद को मेरी उड़ाया था

जब खुदसे में हार गई तो मां को जगाया था

डरी सेहमी सी मुझे देख के माँ ने गले लगाया था

मुझसे पुछा क्या हुआ क्या बुरा सपना आया था

मैं मां को लाई कमरे में और अनको बिस्तर दिखाया था 

माँ मुस्कुराई और प्यार से मुझे सहलाया था

ये हर लडकी की कहानी है ये सत्य मुझे दिखलाया था

ये हर महोने आयेगा और लडकी होने का एहसास कराएग

ये प्राकृतिक प्रक्रिया है जो नया जीवन लायेगा 

तुम न डरो मेरी बच्ची ये तुम्हारी निशानी है

लड़की होने के किस्से की ये सबकी रीत पुरानी है


मां ने दागो को छिपाने का तरीका समझाया था

कैसे रखना ध्यान खुदका मुझे साहस बँधाया था 


ये क्या होता है क्यूं होता है इसका विस्तार सुनाया था

निराला ये एहसास था एक नया विश्वास था

वो लम्हा भी कुछ खास था जब मेरा पहला एहसास था

ईश्वर का वरदान है हर लडकी की पहचान है

इसी खास लम्हे से अब जीवन में सम्मान है

बना दिया उस वक़्त से ख़ास जब से हुआ ये पहला एहसास

 
 
 

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